Homeनागपूर न्यूजदेह व्यापार से वंचित रखने का अधिकार पुलिस को नही: अरुणा सबाने

देह व्यापार से वंचित रखने का अधिकार पुलिस को नही: अरुणा सबाने

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नागपूर,ता. २८ आॅगस्ट: पिछले डेढ़ साल से कोरोना के चलते आम आदमी की जिंदगी तबाह हो गई है और ऐसे वक्त पुलिस द्वारा गंगा जमुना परिसर में स्थित वेश्याओं को अपने धंधे से वंचित रखकर पुलिस इन महिलाओं को आत्महत्या करने के लिए प्रवृत्त कर रही है, ऐसा स्पष्ट आरोप प्रसिद्ध साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता लेखिका अरुणा सबाने ने लगाया है. उक्त आरोप सुश्री. सबाने ने नागरिक मंच द्वारा आज शनिवार दिनांक २८ अगस्त को आयोजित एक व्याख्यान में प्रमुख वक्ता के रूप में भाषण करते हुए दिया. व्याख्यान का विषय था “वेश्या व्यवसाय अवैध या गैरकानूनी”. व्याख्यान की अध्यक्षता मंच के संयोजक एवं कामगार नेता भाई जम्मू आनंद ने की.

अन्य वक्ताओं में प्रमुख रूप से अधिवक्ता निहाल सिंह राठौड़ एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री हेमलता लोहावे थी. सुश्री सबाने ने आगे कहा की महिलाओं को घरों से निकालना उनके घरों पर ताला लगाना यह कृत्य ना सिर्फ मानव अधिकारों का हनन है बल्कि अपने आप में बहुत बड़ा गुनाह है अतः सुश्री. सबाने ने नागपुर पुलिस एवं पुलिस आयुक्त पर सीधा आरोप लगाया कि इस प्रकार की कार्रवाई के पीछे कुछ और मंशा छिपी हुई है.

सुश्री. सबाने ने समाज में व्याप्त नैतिकता के दोहरे मापदंडों को आड़े हाथ लेते हुए वेश्या व्यवसाय में लिप्त महिलाओं को सलाम अर्पित किया कि वह अपनी पहचान को बिना छुपाए समाज के सामने स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करती है. सुश्री. सबाने ने आम नागरिकों से आव्हान किया कि वे पुलिस की इस अमानवीय कार्यवाही के खिलाफ आवाज बुलंद करें.

सभा में अपने विचार रखते हुए अधिवक्ता श्री निहाल सिंह राठौड़ ने बताया कि पिछले कई वर्षों में अब तक करीब १०० नाबालिक लड़कियों को गंगा जमुना इलाके से मुक्त कराया गया लेकिन बड़ी दुख और हैरानी की बात है की सारी लड़कियां वापिस इसी पेशे से जुड़ गई इसका मुख्य कारण की इन लड़कियों का पुनर्वसन नहीं किया गया.

अधिवक्ता राठौड़ ने आगे कहा कि आज वह लड़कियां अब १८ साल पार कर गई लेकिन पुनर्वासन के अभाव में और बार-बार पुलिस की रेड के वजह से कई लड़कियां मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पीड़ित हो गई.

अधिवक्ता राठौड़ ने कहा की पुलिस की भूमिका बहुत सीमित है और वह है कानून का पालन करना और इतना देखना की नाबालिक लड़कियां इस धंधे के शिकार ना हो लेकिन पुलिस नाबालिक लड़कियों को मुक्त करने के नाम पर महिलाओं के संवैधानिक एवं मानव अधिकारों पर ही हमला कर रही है.

सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री. हेमलता लोहावे ने गंगा जमुना इलाके की जमीनी हालात पर रोशनी डाली और उन्होंने दावा किया कि पिछले २० वर्षों में खासकर रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रयत्नों के चलते आज गंगा जमुना इलाके में एचआईवी से पीड़ित एक भी वेश्या नहीं है. उन्होंने कहा कि वेश्याओं के कई बच्चे आज स्कूलों में जाते हैं पढ़ाई करते हैं.

सुश्री. हेमलता ने नागरिकों से आव्हान किया कि वे गंगा जमुना में स्थित महिलाओं के प्रति सकारात्मक रुख अपनाएं.

अपने अध्यक्षीय भाषण में भाई जम्मू आनंद ने उन लोगों को आड़े हाथ लिया जो रक्षाबंधन में वेश्याओं से राखियां तो बंधवा लेते है,लेकिन अपने घर में बेटी या बहन का स्थान नहीं देते. समाज में अपने चेहरे एवं प्रतिष्ठा पाने के लिए समाज का एक घटक वेश्याओं का भी इस्तेमाल करता है जो ना सिर्फ निंदनीय है बल्कि एक घटिया मानसिकता का परिचय भी है.

भाई आनंद ने यह सवाल उठाया की पुलिस कब से सरकार बन गई है और पिछले १५ दिनों से पुलिस की अमानवीय कार्रवाई पर शहर के राजनेताओं की चुप्पी बहुत कुछ कहती है कि आखिर गंगा जमुना इलाके से वेश्याओं को खाली करने में पुलिस आमादा क्यों है? भाई आनंद ने कहा कि इस नाजुक मसले पर समाज चर्चा करने एवं अपनी राय देने से बचना चाहता है तो वही ‘नागरिक मंच’ इस मुद्दे पर चर्चा करवाना चाहता है.

आने वाले दिनों में अनेकों कार्यक्रम करने की बात भाई आनंद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कही. श्रोताओं की ओर से श्री. शिरीष फुलझले उर्फ (मामा), श्री. मोसेस गौर, सुश्री. किरण देशमुख, अध्यक्ष नेशनल सेक्स वर्कर्स नेटवर्क ने भी अपने विचार रखे.

सभा का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सुश्री आराधना उपाध्याय ने किया. सभा में बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे.

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