गांधीबाग बगीचा बचाओ संघर्ष समिती ने महापौर को सौंपा ज्ञापन
नागपुर:- गांधीबाग बगीचे मे बहुमंजिला इमारत बनाने के विरोध में आज मनपा कार्यालय में विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई. इसका नेतृत्व गांधीबाग बगीचा बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक पूर्व नगरसेवक रमण पैगवार के नेतृत्व में किया गया. इस अवसर पर दिलीप नरवाडिया,रवि गाडगे, कमलेश समर्थ,नारायण पौनिकर,होमेश्वर तुमाने, राजकुमार बाथो, इरसाद मलिक, सुमित गोटेकर, गजेंद्रपाल सिंह आदि उपस्थित थे. इस दौरान संघर्ष करो, संघर्ष करो, गांधीबाग बगीचा बचाना है के नारे लगाकर गांधीबाग बगीचा में बन रही 18 मंजिला इमारत की योजना का विरोध कर इस संबंध में महापौर को ज्ञापन सौंपा गया.

इस अवसर पर प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत मध्य नागपुर के स्थित गांधीबाग बगीचे में विकास के नाम पर 18 मंजिल बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। गांधीबाग बगीचे में बिल्डिंग बनवाने एक कंपनी ने रुचि भी दिखाई है. बता दें कि गांधाीबाग बगीचे में स्थित मनपा के स्विमिंग पुल को बंद कर दिया गया है। साथ ही सोख्ता भवन की इमारत को जर्जर अवस्था में पहुंचा दिया है। इस जगह की जमीन के साथ-साथ बगीचे के एक बड़े हिस्से को मिलाकर ‘डिजाइन विल्ड फाइनेंस ऑपरेट एंड सेल ‘के आधार पर एक 18 मंजिल व्यावसायिक संकुल निर्माण कर परियोजना को तैयार करने का काम मनपा ने किया है।
मनपा की करामत…
06/11/2025 को प्रफुल्ल वेद इंफ्रा लिमिटेड को ‘लेटर ऑफ एसेप्टेन्स’ सौंपा गया है। इसमें बगीचे की जगह पर डेवलममेंट के अधिकार के साथ बिक्री (Sale) करने का अधिकार भी दे दिया गया है। इसके लिए प्रदूषण मंडल,फायर डिपार्टमेन्ट,गार्डन डिपार्टमेंन्ट, मेट्रो विभाग,टाऊन प्लानिंग डिपार्टमेंट, आदि से एनओसी भी नहीं ली गई है. बावजूद इसके लेटर ऑफ एसेप्टेन्स मनपा ने कंपनी को दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि इस षड़यंत्र के पीछे कौन वरिष्ठ मनपा अधिकारी व कौन राजनीतिक सख्शीयत इस आर्थिक गतिविधियों में शामिल है।
नागरिकों में इसको लेकर आक्रोश पनप रहा है। यहां आम पर्यावरण प्रेमियों सहित आम नागरिकों का भारी विरोध है। G+1 वाले सोख्ता भवन को तोड़कर 18 मंजिल व्यावसायिक इमारत बगीचे में खड़ी करने की जानकारी आने के बाद बगीचे में आने वाले तमाम नागरिक अचंभित है। विकास के नाम पर यहां इस बगीचे की कुल जमीन का 1/3 हिस्सा कांक्रीट के जंगल में तब्दील करना कहां तक उचित है, पहले से ही बगीचे में कांक्रीट के अनेक कार्य हो चुके हैं अब यहां के करीब 27 पेड़ भी नष्ठ किया जा रहा है। मध्य नागपुर के नागरिकों को मिलने वाली खुली हवा को रोकने व मध्य नागपुर के नागरिकों के सेहत के साथ खिलवाड़ करने प्रयास किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सोख्ता भवन 6700 स्क्वायर फीट में बना हुआ है नवंबर 2003 में राज्य सरकार ने उतनी ही जगह का नोटिफिकेशन जारी कर यहां व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दे दी थी! कालांतर में महाराष्ट्र शासन प्रादेशिक नियोजन और नगर रचना अधिनियम के तहत नागरिक सुविधा केंद्र के नाम पर व्यापारिक संकुल के उपयोग के लिए पहले मंजूरी दी गई जमीन से 10 गुना ज्यादा जमीन अंदाजन 68404 वर्ग फुट अतिरिक्त जगह व्यावसायिक संकुल बनाने हेतु चुपचाप से राजनीतिक दबाव में परिवर्तित कर दिये जाने का आरोप भी समिती ने लगाया है. इसके पहले यहां नौ मंजिल संकुल बनाने की घोषणा प्रशासन ने कर दी थी, तीव्र जन आंदोलन के उपरांत मामला पेंडिंग में रखा गया था। कालांतर में पुनः बगीचे को कांक्रीटकरण में परिवर्तित करने का षड्यंत्र फिर शुरू हो गया है। जिसका नागरिकों द्वारा तीव्र विरोध किया जा रहा है।
मध्य नागपुर क्षेत्र में गांधीबाग परिसर सहित आसपास का क्षेत्र कन्जेस्टेड एरिया घोषित हो चुका है। पूरे क्षेत्र में बगीचे के नाम पर एक मात्र गांधीबाग उद्यान ही बचा हुआ है। गांधीबाग उद्यान अंदाजन 2 लाख वर्ग फुट में बना हुआ है । अब इसमें से 1/3 क्षेत्र को यानी 68400 फुट को अलग कर इस उद्यान को नष्ठ करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। सोख्ता भवन G+1 इमारत 6700 वर्ग फुट में बना हुआ है, लेकिन षड्यंत्र में घोषित 18 मंजिल इमारत के बनने के बाद यहां पर हवा का बहाव बाधित होकर पर्यावरण पर बुरा असर हो सकता है. बता दें कि 382 कार व 566 दो पहिया वाहनों की पार्किंग करते हुए कन्जेस्टेड मुख्य सड़क पर कितना जाम लगेगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। योजना में स्विमिंग पुल को ऊंचे माले पर रखने का प्रावधान रखा गया है यहां कुल जमा पानी से मेट्रो की आवागमन से कंपन होगा उसे झेलने की क्षमता होगी या नहीं इसका भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
नागरिक क्या चाहते हैं…..
नागरिकों कहना है कि सेंट्रल एवेन्यू पर व्यावसायिक माल की जरूरत ही नहीं है क्योंकि इस सड़क पर अनेक भवनों की काफी जगह खाली पड़ी हुई है। गांधीबाग बगीचे के चारों ओर नागपुर शहर का व्यस्ततम व्यापारिक क्षेत्र है ऐसे में मात्र एक यह बगीचा ही है जो खुला हुआ क्षेत्र है। जनमानस व पर्यावरण के लिए के लिए अत्यंत आवश्यक है ऐसे में खुले स्थान की भरपाई कहां से होगी. गांधीबाग उद्यान को कांक्रीट कारण से बचाने वह पर्यावरण की रक्षा करने हेतु एक प्रतिनिधि मंडल नागपुर के सांसद और केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मिला था उन्होंने कहा था कि में एक इंच भी उद्यान की जमीन का व्यवसायीकरण नहीं होने दूंगा, मैं खुद नागपुर शहर में ज्यादा से ज्यादा खेलों के मैदान वह बगीचे बनाने में उत्सुक हूं, तो जनता पूछना चाहती है कि इस षडयंत्र की उन्हें जानकारी है,यदि वे इस योजना के विरोध में है तो कौन से राजनीतिक व नौकरशाह इस उद्यान की जमीन की हेराफेरी करना चाहते हैं यह खुलासा होना जरूरी है।
पर्यायी व्यवस्था…..
नागपुर महानगर पालिका के आयुक्त जनसुनवाई कर इस बगीचे की जमीन को फिर डी नोटिफाईड करके गांधीवाग उद्यान का सुंदर विस्तार कर सकते हैं, ऐसे में वाहन पार्किंग व व्यावसायिक संकुल बनाना ही जरूरी है तो बगीचे के बाजू में ही पुलिस कार्टर जर्जर अवस्था में पड़ा है वहां अत्यंत कम संख्या में पुलिस कर्मचारी निवास करते हैं यहां भी करीब 3.5 एकड़ की जगह उपलब्ध है वहां भी इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है ।
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